लखनऊ…पहले तो कोरोना की भयंकर महामारी के बीच चुनावों का दौर और फिर चुनाव में लगी ड्यूटी के दौरान अपना कर्तव्य निभाते हुए संक्रमित होकर सैकड़ों सरकारी व ग़ैर सरकारी बेकसूर और मासूम कर्मचारियों एवं शिक्षकों की भयावह मौतें एक बड़ा सवाल खड़ा करती हैं कि क्या ये सब कुछ होने से पहले भी रोका जा सकता था, ‘शायद हाँ’…
मगर अब इस चुनाव में कौन हारेगा या कौन जीतेगा ये बड़ी बात नहीं है, बल्कि बड़ी बात तो ये है कि अपने राजनीतिक फायदे के लिए चुनाव में हार जीत के बदले सरकार के नुमाइंदों की लापरवाही और ग़ैर ज़िम्मेदाराना रवैये से न जाने कितनो ने ज़िन्दगी की जंग हारकर बेवजह एवं वक़्त से पहले ही मौत को गले लगा लिया और अपने पीछे न जाने कितने अपनों को ग़मज़दा और बेसहारा छोड़ कर दुनिया से रुखसत हो गए, जो सभी के लिए बड़ी दर्दनाक और असहनीय पीड़ा है…
कोरोना संक्रमण से होने वाली सांस न ले पाने की भयंकर बीमारी और आपदा के बीच होने वाले चुनावों की वजह से आज भी कई जगह से ऐसे वीडियो आ रहे हैं जहां प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस प्रशासन भी बीड को नियंत्रित कर पाने और सोशल डिस्टेंसिनग का पालन करा पाने में असफल नज़र आ रहा है और खिसियाहट मिटाने के लिए जनता के लोगों पर लाठीचार्ज और बल का प्रयोग किया जा रहा है…
पंचायत चुनाव और सीएम योगी का समस्त जिलाधिकारियों व पुलिस अधीक्षकों को कड़ा निर्देश…
जबकि कोरोना संक्रमण जैसी भयंकर बीमारी एवं आपदा की इस तरह की स्थिति पर काबू पाने और संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का समस्त जिलाधिकारियों व पुलिस अधीक्षकों को कड़ा निर्देश है कि मतदान केंद्रों पर कतई भीड़ न एकत्र होने दी जाए और सोशल डिस्टेंसिंग व कोविड प्रोटोकाल का कड़ाई से पालन कराया जाए…
अब फिर एक सवाल ये है कि प्रदेश के मुखिया के आदेश यानी सरकारी दिशा निर्देशों के बाद भी सरकार की किरकिरी कराने और प्रशासनिक लोगों का सरकार के दिशा निर्देशों की धज्जियां उड़ाने की उनकी क्या मंशा है क्या ये सरकार के खिलाफ साज़िश का कोई हिस्सा है या फिर सभी को अपनी अपनी पड़ी है…
मगर ये भी कड़वा सच है कि जनता को भी अपना और अपने परिवार के स्वास्थ्य और उनका अच्छा बुरा सोचकर ही घर से बाहर निकलना चहिए और कोरोना संक्रमण जैसी भयानक महामारी से बचने के लिए मास्क एवं सेनेटाइजर के इस्तेमाल के साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग व कोविड प्रोटोकाल का कड़ाई से पालन करना चाहिए, मगर जनता तो मासूम होती है और उसे सही तरह से जागरूक करना और दिशा निर्देशों का पालन कराने की ज़िम्मेदारी सरकारी नुमाइंदों की होती है तभी जन मानस का कल्याण और देश की सच्ची सेवा की जा सकती है…
अभी भी जनता के मन मे कई सवाल हैं कि ये कब सब कुछ ठीक होगा, इन सब परेशानियों से छुटकारा मिलेगा और कोरोना संक्रमण की भयानक महामारी से लोगों के साथ ही अपने देश को कब राहत मिलेगी, मगर यह सब तो ईश्वर ही जाने, लेकिन बहुत कुछ बेहतर तो सरकार भी कर सकती थी। अब देखना ये है कि लोगों कि ज़िन्दगी बचाने के लिए सरकार किस तरह के कदम उठती है और लापरवाह सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ क्या कार्यवाही करती है।
जुनैद खान “पठान” की क़लम से…








